छत्तीसगढ़ जनवार्ता
पीड़िता पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और आदिवासी समाज को लेकर बयान का मामला, धीरज सिंह पर गाली-गलौज व धमकी के आरोप
अंबिकापुर। अनुपम वस्त्रालय प्रकरण से जुड़ा विवाद अब कानूनी कार्रवाई के दौर में पहुंच गया है। पीड़िता के संबंध में कथित आपत्तिजनक सार्वजनिक टिप्पणी और अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर कथित अपमानजनक बयान के मामले में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ पुलिस ने FIR क्रमांक 0015/2026 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार, सुनीता सोनहा सहित विभिन्न संगठनों ने 15 सितंबर को पुलिस से शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने के दौरान रवीन्द्र तिवारी ने पीड़िता के संबंध में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। साथ ही शकरगढ़ में किसी दुकानदार के साथ पूर्व में हुई कथित घटना का भी उल्लेख किया गया। शिकायतकर्ताओं ने इस दावे की सत्यता की जांच संबंधित थाने के अभिलेखों से कराने की मांग की थी।
शिकायत में अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर कथित टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया, जिसे शिकायतकर्ताओं ने अपमानजनक बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। मामले में सर्व आदिवासी समाज की महिला प्रकोष्ठ सहित अन्य संगठनों ने भी कार्रवाई की मांग उठाई थी।
रवीन्द्र तिवारी पर इन धाराओं में मामला
पुलिस द्वारा दर्ज FIR में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(r), 3(1)(u), 3(1)(w)(ii) और 3(2)(va) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) और 353(2) शामिल की गई हैं। इन धाराओं का संबंध सार्वजनिक रूप से अपमान, समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने तथा जातिगत आधार पर अपमान सहित अन्य आरोपों से है।
धीरज सिंह पर भी FIR दर्ज
इसी बीच अंबिकापुर पुलिस ने भाजपा नेता धीरज सिंह के खिलाफ भी एक अलग मामले में FIR क्रमांक 0702/2026 दर्ज की है। शिकायतकर्ता आकांक्षा टोप्पो के अनुसार कलेक्ट्रेट मैदान के पीछे गेट के पास कथित गाली-गलौज, जातिगत टिप्पणी और धमकी की घटना हुई।
पुलिस ने धीरज सिंह के खिलाफ BNS की धारा 296, 351(1), 78(1) तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(r-s) के तहत अपराध दर्ज किया है।
थाने में घुसकर IPS से बदसलूकी के आरोप भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरोपी धीरज को कथित रूप से दबंगई के साथ थाने से ले जाने और थाने में IPS अधिकारी से बदसलूकी किए जाने के आरोपों ने भी विवाद को और तूल दिया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
फिलहाल दोनों मामलों में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच, साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी। अनुपम वस्त्रालय प्रकरण से जुड़े इस पूरे विवाद पर अब पुलिस कार्रवाई और संबंधित पक्षों के बयानों पर नजर बनी हुई है।










