छत्तीसगढ़ जनवार्ता
दिव्य ज्योति के विशेष बच्चों का खेल मैदान बचाने की गुहार, निर्माण को लेकर उठे सवाल
कोरबा। दिगापुर स्थित दिव्य ज्योति विशेष विद्यालय एवं छात्रावास के विशेष बच्चों के लिए वर्षों से उपयोग में आ रहे खेल मैदान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 25 वर्षों से मूक-बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों के खेल, व्यायाम और पुनर्वास गतिविधियों के लिए उपयोग की जा रही भूमि पर अन्य निर्माण किए जाने को लेकर संस्था से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है।
विशेष बच्चों के इस खेल मैदान को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर रोटरी क्लब ऑफ कोरबा और इनर व्हील एजुकेशन सोसायटी, कोरबा द्वारा जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया है। संस्था का कहना है कि यह जमीन विशेष बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे किसी अन्य प्रयोजन में उपयोग किए जाने से बचाया जाना चाहिए।
कलेक्टर को दिया आवेदन, एक माह बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं
इस मामले में रोटरी क्लब ऑफ कोरबा द्वारा मंत्री लखनलाल देवांगन को तथा इनर व्हील एजुकेशन सोसायटी द्वारा 11 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपा गया था। आवेदन में भूमि को विशेष बच्चों के खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखने की मांग की गई।
संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार, आवेदन के बाद कलेक्टर ने मामले को देखने और जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद प्रतिनिधियों द्वारा दो बार कलेक्टर से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग भी की गई, लेकिन करीब एक माह बीत जाने के बाद भी मामले में कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है।
रात में निर्माण को लेकर भी सवाल, ठेकेदार पर धमकी देने का आरोप
मामले में निर्माण कार्य के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। संस्था से जुड़े लोगों का आरोप है कि मैदान में निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार द्वारा बच्चों और संस्था से जुड़े लोगों को कथित रूप से धमकाया जा रहा है।
आरोप के मुताबिक, ठेकेदार ने कथित तौर पर कहा कि “तुमको जो करना है कर लो, मैं तो काम करूंगा।” हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य दिन के बजाय रात के समय किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्य रात में क्यों किया जा रहा है और क्या इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई है?
भूमि आवंटन और निर्माण की वैधानिकता पर उठे सवाल
विशेष बच्चों के खेल मैदान को लेकर अब प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या उक्त भूमि का किसी अन्य प्रयोजन के लिए विधिवत आवंटन किया गया है? यदि आवंटन हुआ है तो क्या विशेष विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के हितों को ध्यान में रखा गया? निर्माण की अनुमति किस विभाग ने दी और क्या उसके लिए आवश्यक नक्शा एवं स्वीकृति उपलब्ध है?
इसके अलावा रात में निर्माण कार्य किए जाने की अनुमति है या नहीं और संस्था की आपत्ति के बावजूद निर्माण जारी रखने का आधार क्या है, इन बिंदुओं पर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।
बच्चों के विकास से जुड़ा है खेल मैदान
संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि विशेष बच्चों के लिए खेल मैदान महज एक खाली जमीन नहीं है। यह उनके शारीरिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और आत्मविश्वास बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में वर्षों से बच्चों के उपयोग में रही इस भूमि को सुरक्षित रखना जरूरी है।









