कोरबा: फोर-लेन सड़क परियोजना पर घमासान, बालको क्षेत्र के दुकानदारों ने विस्थापन और रोज़गार को लेकर खोला मोर्चा

छत्तीसगढ़ जनवार्ता

कोरबा । कोरबा के बालकोनगर क्षेत्र में वेदांता-बालको द्वारा प्रस्तावित सड़क निर्माण योजना और स्थानीय छोटे दुकानदारों पर मंडराते बेदखली के खतरे ने जन-असंतोष बढ़ा दिया है। दर्री डैम से रिसदी चौक तक बनने वाले सड़क मार्ग के परसाभाटा वाले हिस्से को अचानक फोर-लेन (Four-Lane) बनाने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

 

रोज़गार का अभाव और आजीविका का संघर्ष

वेदांता-बालको जैसे बहुराष्ट्रीय और विशाल औद्योगिक संयंत्र से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को हमेशा प्राथमिकता के आधार पर रोज़गार की उम्मीद रहती है। हालांकि, ज़मीनी हकीकत यह है कि जब पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, तो लोग अपने और अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए सड़क किनारे छोटी-छोटी गुमटियां और दुकानें लगाकर रोज़ी-रोटी कमाते हैं।

बीते कुछ समय से इन छोटे व्यापारियों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। आरोप हैं कि वेदांता प्रबंधन द्वारा इन दुकानदारों को डराया-धमकाया जा रहा है, उनकी दुकानों की तस्वीरें खींचकर उन्हें हटाने के नोटिस (चेतावनी पत्र) दिए जा रहे हैं।

“बालको संयंत्र में हमें नौकरी नहीं मिली, तो हमने सड़क किनारे छोटी सी दुकान खोल ली ताकि परिवार का पेट भर सकें। अब रोज़ अधिकारी आकर फोटो खींचते हैं और हटाने की धमकी देते हैं। अगर यह दुकान भी छीन ली गई, तो हम कहां जाएंगे?”

रामेश्वरी साहू, स्थानीय प्रभावित व्यवसायी

 

*सड़क निर्माण का ‘अजीब गणित’: 2-लेन के बीच 4-लेन क्यों?*

 

विवाद का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू सड़क निर्माण के मानकों में असमानता का है। निर्माण योजना के अनुसार:

* पहला खंड: दर्री डैम रूमगरा के ध्यानचंद चौक से परसाभाटा के बजरंग चौक तक — टू-लेन (Two-Lane) “प्रशासन द्वारा निर्मित”

* मध्य खंड: बजरंग चौक (परसाभाटा) से रिसदा चौक (भदरापारा) तक — फोर-लेन (Four-Lane) “वेदांता-बालको द्वारा निर्मित”

* अंतिम खंड: नया रिस्दा भदरापारा चौक से ग्राम रिसदी चौक तक — टू-लेन (Two-Lane) “प्रशासन द्वारा निर्मित”

 

सवाल यह उठ रहा है कि पूरी सड़क के मुख्य मार्ग को टू-लेन बनाया जा रहा है, तो केवल बजरंग चौक परसाभाठा से रिसदा चौक भदरापारा के बीच वाले हिस्से को ही फोर-लेन बनाने का क्या औचित्य है? क्या यह निर्णय जनहित में है या केवल वेदांता के कॉर्पोरेटी हितों के लिए?

वर्षों से इस मार्ग पर व्यापार कर रहे परिवारों में अब यह डर व्याप्त है कि फोर-लेन के नाम पर केवल उन्हें उजाड़ने की योजना बनाई जा रही है।

 

## प्रमुख मांगें:

* रोज़गार में प्राथमिकता: स्थानीय युवाओं को वेदांता-बालको में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार में प्राथमिकता दी जाए।

* व्यवस्थित पुनर्वास: स्थानीय उद्यमी संगठन के साथ संवाद स्थापित कर छोटे दुकानदारों के लिए एक व्यवस्थित ‘वेंडिंग ज़ोन’ (व्यापारिक स्थल) विकसित किया जाए।

* सड़क निर्माण योजना का सार्वजनिक प्रदर्शन: पूरी सड़क का नक्शा और डीपीआर (DPR – Detailed Project Report) सार्वजनिक किया जाए।

* समान मानक: सड़क निर्माण पूरी तरह से एक समान (या तो पूरी टू-लेन या पूरी फोर-लेन) हो, ताकि विस्थापन की अनिश्चितता खत्म हो।

* प्रशासनिक जांच: जिला प्रशासन निष्पक्षता से पूरे मामले की जांच करे और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले मानवीय दृष्टिकोण अपनाए।

 

औद्योगिक विकास का उद्देश्य स्थानीय समुदाय को समृद्ध बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें आजीविका से बेदखल करना। यदि विकास की इस दौड़ में सड़क किनारे आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे छोटे उद्यमी और उनके परिवार अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिए जाते हैं, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। जिला प्रशासन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर पारदर्शी संवाद का रास्ता बनाना चाहिए, ताकि विकास और आजीविका दोनों का संतुलन बना रहे।

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