कोरबा में राखड़ डैम का तटबंध चौथी बार टूटा, प्रबंधन एक्शन मोड में जांच, जुर्माना और सुधार कार्यों में आई तेजी, विशेषज्ञ टीम करेगी बारीकी से पड़ताल

छत्तीसगढ़ जनवार्ता

कोरबा, छत्तीसगढ़ | दर्री स्थित हसदेव ताप विद्युत गृह के नवागांव-झाबुआ क्षेत्र में बने राखड़ डैम का 19 अप्रैल को चौथी बार तटबंध टूटना अब एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है। पहले भी तीन बार इसी स्थान से तटबंध ध्वस्त हो चुका था, लेकिन इस बार एक युवक की मौत के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है।

घटना के बाद जिला प्रशासन और प्रबंधन दोनों ही सक्रिय हो गए हैं। प्रशासन ने एडिशनल कलेक्टर ओंकार यादव के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर दी है, वहीं सीएसईबी प्रबंधन द्वारा विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। पर्यावरण और जल संसाधन विभाग ने जुर्माना लगाने के साथ ही सुधार कार्यों को भी तेज कर दिया है।

राउरकेला से पहुंचेगी विशेषज्ञ टीम

जानकारी के अनुसार, ओडिशा के राउरकेला से एनआईटी से जुड़े विशेषज्ञ श्री सी.आर. पात्रा के नेतृत्व में टीम कोरबा पहुंच रही है। यह टीम सोमवार से तटबंध टूटने के कारणों की गहराई से जांच करेगी। साथ ही दर्री क्षेत्र के अन्य राखड़ डैमों का निरीक्षण कर तकनीकी सुझाव भी देगी।

प्रारंभिक कारण: दबाव और ड्रेनेज की कमी

प्रारंभिक जांच में अत्यधिक पानी का दबाव और उचित ड्रेनेज सिस्टम की कमी को घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी ड्रेनेज और टेंपरेरी फिल्टर लगाए गए हैं, ताकि नदी के पानी को प्रदूषण से बचाया जा सके।

नए अभियंता ने संभाली कमान

घटना के बाद अधीक्षण अभियंता (सिविल) एस.के. साहू को यहां पदस्थ किया गया है। उन्होंने मौके पर पहुंचकर मरम्मत और निगरानी कार्यों को तेज कर दिया है। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही स्थायी समाधान की दिशा तय की जाएगी।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

प्रबंधन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घटना तकनीकी खामी का परिणाम थी या मानव लापरवाही का।

राखड़ प्रबंधन में बदलाव

जिस पॉन्ड का तटबंध टूटा है, वहां राखड़ डालना फिलहाल बंद कर दिया गया है। दूसरे पॉन्ड में सीमित क्षमता के साथ कार्य जारी है। डैम में दबाव कम करने के लिए पांच ठेकेदारों को लगाया गया है, जो प्रतिदिन लगभग 5000 घन मीटर राखड़ बाहर भेज रहे हैं। इस राखड़ का उपयोग बिलासपुर, रतनपुर और चोटिया क्षेत्रों में किया जाएगा।

ग्रामीणों को राहत देने की कोशिश

आसपास के गांवों में राखड़ उड़ने से हो रही परेशानी को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण उपाय भी तेज किए गए हैं। स्प्रिंकलर, टैंकर और ग्रीन बेल्ट जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

चार बार एक ही स्थान से तटबंध टूटना कई सवाल खड़े करता है—क्या पहले की जांचों में वास्तविक कारण सामने नहीं आ पाए थे? क्या सुधार कार्य पर्याप्त नहीं थे?

हालांकि इस बार जिस तरह से जांच, जुर्माना और सुधार कार्य एक साथ चल रहे हैं, उससे उम्मीद जरूर जगी है कि अब स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

अब सबकी नजर विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर है—क्या यह “चौथी चेतावनी” सिस्टम के लिए आखिरी साबित होगी?

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