पताढ़ी में अडानी की ताप विद्युत परियोजना पर किसानों का विरोध तेज, 60 किसानों ने 220 एकड़ भूमि देने से किया इनकार

छत्तीसगढ़ जनवार्ता 

2013 के भू-अधिग्रहण कानून के तहत चार गुना नहीं, वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजे की मांग; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

कोरबा। जिले के पताढ़ी क्षेत्र में प्रस्तावित अडानी समूह की ताप विद्युत परियोजना के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। परियोजना से प्रभावित किसानों ने मुआवजे को लेकर प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र के करीब 60 किसानों ने लगभग 220 एकड़ पुश्तैनी भूमि परियोजना के लिए देने से साफ इनकार कर दिया है।

किसानों का आरोप है कि उन्हें ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ के प्रावधानों के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि परियोजना प्रबंधन वर्ष 2007 की प्रक्रिया के आधार पर मुआवजा तय करने की बात कर रहा है, जबकि वर्तमान में लागू कानून के अनुसार उन्हें उचित और न्यायसंगत प्रतिकर मिलना चाहिए।

बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग

प्रभावित किसानों के अनुसार पहले लगभग 13 हजार रुपये प्रति डिसमिल की दर तय की गई थी, जिसे चार गुना बढ़ाकर करीब 52 हजार रुपये प्रति डिसमिल देने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। किसानों का दावा है कि वर्तमान बाजार मूल्य करीब 50 हजार रुपये प्रति डिसमिल है। ऐसे में 2013 के कानून के प्रावधानों के अनुसार उन्हें लगभग 2 लाख रुपये प्रति डिसमिल का मुआवजा मिलना चाहिए।

बिना उचित मुआवजे के सहमति का आरोप

किसानों ने जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि उचित मुआवजा तय किए बिना उनसे सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें कानून के अनुरूप प्रतिकर नहीं मिलेगा, तब तक वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर परियोजना को नहीं सौंपेंगे।

ज्ञापन की प्रतिलिपि उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री, सांसद, स्थानीय विधायक तथा पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है, ताकि मामले में उचित हस्तक्षेप किया जा सके।

आंदोलन की चेतावनी

प्रभावित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना उचित मुआवजे के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई या किसी प्रकार का दबाव बनाया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके भविष्य, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है।

प्रशासन और परियोजना प्रबंधन पर टिकी निगाहें

पटढ़ी में बढ़ते विरोध के बीच अब सभी की नजरें जिला प्रशासन, परियोजना प्रबंधन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि किसानों और परियोजना प्रबंधन के बीच सहमति नहीं बनती है, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है तथा परियोजना की प्रगति भी प्रभावित हो सकती है.

 

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