दीपका–पेंड्रा रेल परियोजना: जल निकासी की बदहाल व्यवस्था और स्टेशन नामकरण को लेकर ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश

कोरबा छत्तीसगढ़

कटघोरा। दक्षिण पूर्व रेलवे की महत्वाकांक्षी दीपका–पेंड्रा रेल मार्ग परियोजना के अंतर्गत विकासखंड कटघोरा के ग्राम मुढ़ाली, कोलिहामुड़ा और जवाली के मध्य निर्मित रेलवे स्टेशन तथा अंडर ब्रिज अब स्थानीय लोगों के लिए सुविधा से अधिक परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। एक ओर अंडर ब्रिज के नीचे जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से हर वर्ष बरसात में आवागमन बाधित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्टेशन के नामकरण को लेकर भी क्षेत्रवासियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

बरसात शुरू होते ही अंडर ब्रिज के नीचे पानी और कीचड़ जमा होने की समस्या फिर सामने आ गई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2025 में 6 जुलाई को हुई भारी बारिश के दौरान मिट्टी और मलबा बहकर पुल के नीचे जमा हो गया था, जिससे घुटनों तक पानी भर गया था। इस वर्ष भी स्थिति लगभग वैसी ही बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे प्रबंधन ने स्थायी समाधान के नाम पर केवल कंक्रीटीकरण कराया, लेकिन जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं बनाई गई। मार्ग की ऊंचाई का समुचित समायोजन नहीं होने और दोनों ओर मिट्टी डाल देने से पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। परिणामस्वरूप बरसात के दिनों में लोगों को जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरना पड़ रहा है।

इस समस्या का असर केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं है। मुढ़ाली, कोलिहामुड़ा, फुलझर, देवगांव, बतारी, नेहरू नगर, डोंगरी, तिलवारी, जवाली सहित लगभग 10 गांवों के हजारों लोग प्रतिदिन इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। इसके अलावा पावर प्लांट, कोल वाशरी और अन्य औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कर्मचारी, विद्यार्थी, किसान, महिलाएं, मजदूर और व्यापारी भी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। साइकिल, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर, पिकअप, बोलेरो, स्कूल बस और अन्य छोटे-बड़े वाहनों को कीचड़युक्त मार्ग से गुजरने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी प्रतिदिन परेशानी झेल रहे हैं।

इधर रेलवे स्टेशन के नामकरण को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्टेशन का नाम “कटघोरा स्टेशन” रखा गया है, जबकि कटघोरा नगर यहां से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि स्टेशन जिस क्षेत्र में बनाया गया है, वह आसपास के ग्रामीणों और किसानों की भूमि है तथा यह उनकी पहचान, संस्कृति और आदिवासी अस्मिता से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। ऐसे में स्टेशन का नाम “जवाली रेलवे स्टेशन” रखा जाना अधिक न्यायसंगत होगा।

ग्रामीणों ने बताया कि लगभग दो माह पूर्व क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने जिला कलेक्टर, रेल मंडल प्रबंधक तथा संबंधित विभागों को संयुक्त आवेदन सौंपकर स्टेशन का नाम “जवाली रेलवे स्टेशन” रखने और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की थी। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते दोनों समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जनआक्रोश बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बरसात के दौरान यदि किसी प्रकार की दुर्घटना या जनहानि होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।

स्थानीय नागरिकों ने शासन और रेलवे प्रशासन से मांग की है कि जल निकासी की वैज्ञानिक एवं स्थायी व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए तथा क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को सम्मान देते हुए स्टेशन का नाम “जवाली रेलवे स्टेशन” घोषित किया जाए।

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