कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा। औद्योगिक विकास की चमक के पीछे छिपी भयावह सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले कोरबा में हसदेव थर्मल पावर प्लांट के झाबु क्षेत्र स्थित राखड़ डैम का तटबंध रविवार, 19 अप्रैल 2026 को एक बार फिर टूट गया। पिछले दो महीनों में यह चौथी घटना है, लेकिन इस बार इस हादसे ने एक युवा की जान ले ली।
मरम्मत कार्य के दौरान काम कर रही जेसीबी मशीन अचानक राख और कीचड़ के दलदल में धंस गई। मशीन में सवार 25 वर्षीय ऑपरेटर तुलेश्वर कश्यप, निवासी ग्राम सेंडल, भारी दबाव में दब गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

शादी से पहले ही बुझ गया एक घर का चिराग
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि तुलेश्वर कश्यप कुछ ही दिनों में शादी करने वाले थे। परिवार के मुताबिक, वह काम खत्म कर छुट्टी लेकर घर लौटने वाले थे, जहां शादी की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन नियति ने खुशियों को मातम में बदल दिया। जिस घर में शहनाई गूंजने वाली थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, मुआवजे के बाद शांत हुआ विरोध
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने घटनास्थल पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई तथा मुआवजे की मांग की। लंबे विरोध के बाद प्रबंधन ने 25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
प्रशासन मौके पर, लेकिन जवाब अधूरे
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच की बात कही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पहले ही तीन हादसे हो चुके थे, तो समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
सरपंच का आरोप: चेतावनियों को किया गया नजरअंदाज
ग्राम सरपंच लखन सिंह कंवर ने प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि 20 फरवरी से लगातार डैम की खराब स्थिति की जानकारी दी जा रही थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो आज यह हादसा टल सकता था।
दो महीने में चार बार टूटा डैम
ग्रामीणों के अनुसार, झाबु स्थित राखड़ डैम:
02 फरवरी को पहली बार टूटा
20 फरवरी को दूसरी बार
02 मार्च को तीसरी बार
19 अप्रैल को चौथी बार, जिसमें एक युवक की जान चली गई
बार-बार तटबंध का टूटना प्रबंधन की गंभीर लापरवाही और तकनीकी विफलता की ओर इशारा करता है।
पर्यावरण पर भी खतरा
तटबंध टूटने से राख युक्त पानी हसदेव नदी में जा मिला, जिससे कई जगह पानी सफेद दिखाई देने लगा। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इसका असर खेती, पेयजल और पर्यावरण पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा सवाल
एक के बाद एक चार हादसे…
एक युवा की मौत…
और हर बार वही जवाब — “जांच जारी है”
क्या यह सिर्फ एक हादसा है या सिस्टम की लापरवाही का परिणाम?
कोरबा की यह घटना न सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है जहां चेतावनियों को नजरअंदाज किया जाता है और कीमत मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।











