छत्तीसगढ़ जनवार्ता
जांच में 68 गलत मोबाइल नंबर, मरीजों से नगद राशि लेने के बयान और नवजातों के उपचार में मिली अनियमितताएं; पैथोलॉजी-अल्ट्रासोनोग्राफी के रिकॉर्ड भी नहीं मिले
कोरबा। गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। कोरबा जिले के कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद अस्पताल का आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन एक साल के लिए निरस्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की 5 नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान मरीजों के परिजनों से नगद राशि लिए जाने संबंधी बयान सामने आए। वहीं अस्पताल की भर्ती फाइलों में दर्ज 68 मोबाइल नंबर गलत अथवा उपयोग में नहीं पाए गए। इस खुलासे ने अस्पताल के रिकॉर्ड संधारण और मरीजों के उपचार संबंधी जानकारी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में नवजात शिशुओं के उपचार से संबंधित अनियमितताएं भी पाई गईं। इसके अलावा पैथोलॉजी और अल्ट्रासोनोग्राफी से जुड़े अभिलेख भी जांच दल को उपलब्ध नहीं कराए जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन विभाग के मुताबिक अस्पताल का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत अस्पताल का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पंजीयन एक वर्ष के लिए निरस्त किया गया है।
कार्रवाई के तहत अस्पताल को इस अवधि में आयुष्मान योजना के अंतर्गत नए मरीज भर्ती नहीं करने और अस्पताल परिसर से योजना के प्रचार-प्रसार से संबंधित सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बरकरार
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि मरीजों के परिजनों से नगद राशि लेने के मामले में कितने मरीज प्रभावित हुए और उनसे कितनी रकम वसूली गई? क्या संबंधित मरीजों को उनकी राशि वापस दिलाने की पहल होगी? भर्ती रिकॉर्ड में 68 गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने और नवजात शिशुओं के उपचार संबंधी अनियमितताओं की विस्तृत जांच भी जरूरी है।
आयुष्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बिना आर्थिक बोझ के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना से जुड़े अस्पतालों में इस तरह की अनियमितताएं सामने आना स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
फिलहाल अस्पताल का पंजीयन एक साल के लिए निरस्त कर दिया गया है, लेकिन मरीजों से जुड़ी शिकायतों, कथित नगद वसूली और उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग आगे इस मामले में क्या कदम उठाता है।







