छत्तीसगढ़ जनवार्ता
कोरबा जिले के उपनगरीय क्षेत्र पसान में इस बार दशहरा का उत्सव विवादों में घिरता नजर आ रहा है। नवरात्रि के अंतिम दिन हवन-पूजन के बाद दशहरे का पर्व पूरे देश की तरह कोरबा में भी परंपरागत और धूमधाम से मनाया जाता है। कोरबा शहर सहित दर्री, दीपका, पाली, कटघोरा, बांकीमोंगरा, हरदीबाजार और पसान जैसे क्षेत्रों में हर साल रंगारंग कार्यक्रमों के साथ रावण दहन किया जाता है। बड़ी संख्या में ग्रामीण और शहरी लोग दशहरा मेलों में शामिल होते हैं।
पसान में पिछले वर्ष 2024 में हिंदू धर्मरक्षण संगठन के तत्वाधान में रावण दहन उत्सव हुआ था रावण दहन प्रथा की शुरुआत करने वाले हिंदू धर्म रक्षण संगठन ही था आसपास के लगभग 80000 से 10000 की जनता इस कार्यक्रम में शामिल हुई कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए कार्यक्रम में राजनीति प्रवेश हुई
इस बार पसान में रावण दहन आयोजन को लेकर यज्ञ स्थल एवं देव स्थान बोर्ड ने विवाद पैदा कर दिया है दो संगठनों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। हिंदू धर्म रक्षण संगठन और यज्ञ स्थल पसान एवं देवस्थानम बोर्ड दोनों संगठनों ने एक ही स्थान पर रावण दहन करने का दावा किया है। आयोजकों ने राजा लालमन सिंह सत्यमेव जयते स्टेडियम में कार्यक्रम की घोषणा की है, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
हिंदू धर्म रक्षण संगठन ने रावण बनाने की तैयारी का आधा काम कर भी लिया है वहीं बगल में ही दूसरे संगठन के द्वारा भी रावण दहन की तैयारी चल रही है अब एक ही जगह में दो-दो रावण कैसे चलेगा विवाद की स्थिति एक रावण आयोजन करता को अनियंत्र स्थापित करना ही पड़ेगा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन इस विवाद में हस्तक्षेप कर सकता है। आने वाले दिनों में दोनों संगठनों के प्रमुखों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा सकता है। इस तरह के धार्मिक आयोजनों में टकराव न हो, इसके लिए प्रशासन आयोजन स्थल, समय और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
दशहरा: बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व
गौरतलब है कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष रावण दहन के माध्यम से इस पर्व को उल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। ऐसे में आयोजन को लेकर विवाद न केवल धार्मिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आयोजन में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा और व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और दोनों संगठनों के बीच सहमति से आयोजन करवाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं ज्यादातर लोगों का यह भी कहना है कि जो पिछले वर्ष की आयोजन समिति थी उसे ही करने दिया जाना चाहिए
सूत्रों से मिली प्राप्त जानकारी के अनुसार चुनावी रंजिश के तहत इस कार्यक्रम को नहीं होने दिया जा रहा है हिंदू धर्मरक्षण संगठन के अध्यक्ष राजकुमार पांडेय जो कि जनपद क्षेत्र क्रमांक एक जनपद सदस्य प्रत्याशी रहे हैं और दूसरे स्थान पर रहे हैं जीते हुए प्रत्याशी के द्वारा हर कामों में बाधा उत्पन्न किया जा रहा है ऐसे तत्व भी सामने आ रहे हैं
पूर्व में आयोजन समिति जो हिंदू धर्म रक्षण संगठन उनके सदस्यों का कहना है कि हम सभी को साथ में लेकर चलने को तैयार हैं पर वह हमारे साथ नहीं चल रहे हैं
वहीं दूसरी तरफ दूसरी आयोजन समिति का कहना है कि हिंदू धर्म रक्षण संगठन वाले को संगठन का नाम से हिंदू शब्द हटा देना चाहिए और नए संगठन का नाम रखकर कार्यक्रम कर सकते हैं
क्षेत्र वासियों को प्रशासन से न्याय की उम्मीद पुरानी आयोजन करता को मौका मिलना चाहिए अगर ऐसा नहीं होता है तो कोई भी आयोजन करता किसी भी के कार्यक्रम को हाईजैक कर सकती है आगामी वर्षों में इससे समाज में होने वाले हिन्दू धार्मिक आयोजनों में असंतुलन पैदा हो जाएगा












