कोरबा में पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप, भूमि अधिग्रहण व खनन परियोजनाओं पर उठे सवाल

कोरबा छत्तीसगढ़

कोरबा, छत्तीसगढ़। कोरबा जिले में भूमि अधिग्रहण, खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर पेसा कानून के कथित उल्लंघन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद, जिला-कोरबा ने इस संबंध में महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री एवं जिला प्रशासन को ज्ञापन प्रेषित कर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि कोरबा जिला पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा कानून) प्रभावी है। इसके बावजूद जिले में संचालित विभिन्न भूमि अधिग्रहण, खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं में ग्राम सभा की पूर्व एवं स्पष्ट सहमति नहीं ली जा रही है, जो कि कानून का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।

परिषद ने विशेष रूप से पताड़ी कोरबा स्थित लैको (अदानी पावर) की विस्तार परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि Adani Power की परियोजनाओं को ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना आगे न बढ़ाया जाए। साथ ही पसान क्षेत्र के जल्के में प्रस्तावित संगटा कोल ब्लॉक को भी बिना ग्राम सभा की सहमति एवं खनन से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों के समुचित अध्ययन के मंजूरी न देने की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि नई औद्योगिक एवं खनन परियोजनाओं के कारण क्षेत्र में पर्यावरण क्षति, बड़े पैमाने पर विस्थापन, स्वास्थ्य समस्याएँ, कृषि भूमि की हानि, जल स्रोतों पर प्रभाव तथा सामाजिक असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि स्थानीय निवासियों की राय को प्राथमिकता दी जाए।

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राम सभाओं को जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर पारंपरिक एवं संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। बिना ग्राम सभा की मंजूरी के किसी भी परियोजना की जनसुनवाई अथवा विस्तार प्रक्रिया संचालित किया जाना पेसा कानून की भावना के विपरीत है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि कोरबा जिले में पेसा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा भविष्य में किसी भी परियोजना को ग्राम सभा की पूर्व सहमति के बिना स्वीकृति न दी जाए।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज है और प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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