किसान आत्महत्या को मजबूर, सत्ता कार्यालय सजा रही — युवा कांग्रेस के विरोध को पुलिस ने कुचला

कोरबा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में जब किसान धान बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है, तब सत्ता पक्ष जश्न और भवन निर्माण में व्यस्त है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कोरबा प्रवास के दौरान भाजपा के नए कार्यालय भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम के खिलाफ युवा कांग्रेस का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार की किसान-विरोधी, जनविरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए काला झंडा दिखाने का प्रयास किया।

जिला कांग्रेस कार्यालय से शांतिपूर्ण ढंग से निकले युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करते हुए बलपूर्वक हिरासत में ले लिया। उन्हें पुलिस लॉरी में ठूंसकर लगभग तीन किलोमीटर दूर कुसमुंडा थाना ले जाकर घंटों बैठाए रखा गया। मुख्यमंत्री के कोरबा से प्रस्थान करते ही सभी को रिहा कर दिया गया, जिससे साफ़ होता है कि पूरी कार्रवाई सत्ता की सुरक्षा और असहमति को दबाने के लिए की गई।

यह विरोध ऐसे समय में हुआ है जब छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी योजना भ्रष्टाचार और अफसरशाही के दलदल में पूरी तरह धंस चुकी है। हजारों किसान टोकन नहीं मिलने की वजह से अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं और सरकार द्वारा घोषित अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है जिसके कारण किसान कर्ज़, भूख और मानसिक तनाव में जी रहे हैं। हालात इतने अमानवीय हो चुके हैं कि कई किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिनमें से कुछ आज भी अस्पतालों में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

युवा कांग्रेस का कहना है कि सरकार किसानों की पीड़ा पर संवेदनशील होने के बजाय भव्य कार्यालयों के शिलान्यास में व्यस्त है। इसी पीड़ा का प्रतीक था उनका नारा—

“किसान मर रहा है और कार्यालय सज रहा है।”

युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में लोकतंत्र केवल भाषणों तक सीमित रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि सवाल उठाने वालों को पुलिस के ज़रिए चुप कराया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को उनका हक़, धान खरीदी की पारदर्शिता और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन जत्थे में विकास सिंह, राकेश पंकज, नवीन कुकरेजा, सुनील निर्मलकर, धनंजय दीवान, कुणाल आजाद, मधुसुदन दास, विवेक श्रीवास, मिनिकेतन गवेल विशेष रूप से शामिल रहे.

 

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