देवरी पुल बना जानलेवा, प्रशासन की उदासीनता से दर्जनों पंचायतों का जीवन अस्त-व्यस्त”

कोरबा छत्तीसगढ़

विकासखंड कटघोरा के अंतर्गत ग्राम देवरी में स्थित मुख्य पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने से क्षेत्र में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। पुल टूटने के बाद उसके नीचे बने पुराने और जर्जर पुल को अस्थायी रूप से मरम्मत कर आवागमन चालू किया गया है, जो किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक पुल के स्थायी पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से लगभग दर्जनों पंचायतों के ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने में कठिनाई हो रही है, मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचना जोखिम भरा हो गया है, वहीं बड़ी गाड़ियों के आवागमन बंद होने से व्यापार और परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

वर्तमान में शासन की महत्वपूर्ण धान खरीदी योजना भी इस पुल के टूटने से प्रभावित हुई है। किसानों को धान बेचने के लिए अब अरदा, ढेलवाडीह और सिंघाली मार्ग से होते हुए जवाली समिति तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों दोगुना हो गया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में निर्मित यह पुल मात्र 16 वर्ष भी नहीं टिक पाया, जो घटिया निर्माण गुणवत्ता का ज्वलंत उदाहरण है। उस समय जनपद सदस्य रहे बुंदेली कसई पाली के रूप सिंह बिंध्यराज ने निर्माण में अनियमितता की शिकायत कलेक्टर से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज उसी लापरवाही का खामियाजा आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

भारी बारिश के दौरान मुख्य पुल के टूट जाने के बाद, पहले से क्षतिग्रस्त पुराने छोटे पुल को पंचायत स्तर पर अस्थायी रूप से दुरुस्त कराया गया। आसपास की तीन पंचायतों के सरपंच — शिवलाल, ललितेश प्रताप सिंह और उमा देवी रामकुमार गौंटिया — के प्रयास से इसे पैदल, दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए चालू किया गया, लेकिन यह व्यवस्था न तो सुरक्षित है और न ही स्थायी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। वर्तमान में लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि देवरी पुल का शीघ्र निरीक्षण कर स्थायी और गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को इस गंभीर संकट से राहत मिल सके। इस विषय पर कई बार मीडिया में खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन डबल इंजन की सरकार के कार्यकाल में भी ग्रामीण अब तक ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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