35 साल पुराने जर्जर भवन में संचालित राशन दुकान, बारिश में रिसता पानी—ग्रामवासियों को हो रही भारी परेशानी”

जवाली (जिला कोरबा, छत्तीसगढ़):
ग्राम जवाली की शासकीय उचित मूल्य की दुकान, जो कि सन 1980 में निर्मित एक जर्जर भवन में संचालित हो रही है, वर्तमान में ग्रामीणों के लिए एक जटिल समस्या बन गई है। दुकान का संचालन चांदनी स्व सहायता समूह की महिलाएं कर रही हैं, जो ग्राम के 1075 राशन कार्डधारक परिवारों को चावल, मिट्टी तेल, चना, शक्कर, नमक जैसी आवश्यक सामग्री वितरण करती हैं।

बारिश के दिनों में इस पुराने भवन की छत और दीवारों से पानी लगातार रिसता रहता है, जिससे न केवल खाद्यान्न सामग्री भीगने का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि ग्रामीणों और समूह की महिलाओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इस समस्या की जानकारी पंचायत के सरपंच व अन्य जनप्रतिनिधियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

चांदनी स्व सहायता समूह की ओर से स्वयं मरम्मत करवाने की कोशिश की गई थी, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इस कारण पांच महिलाओं ने दुकान में कार्य करना छोड़ दिया है।

पूर्व सरपंच पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ऐसे सार्वजनिक कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी, जिसकी वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वहीं वर्तमान सरपंच दिलेश कुमार कंवर के अनुसार उनके कार्यकाल में समस्याएं उजागर हो रही हैं, और उनका प्रयास है कि समाधान भी समय पर हो।

आज जब दुनिया डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रही है, तब गांवों में बुनियादी जरूरतें—जैसे सुरक्षित भवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक शांति—अब भी एक सपना बनी हुई हैं। जवाली ग्राम में नशे की सामग्री का खुलेआम बिकना, शिक्षा व स्वास्थ्य की योजनाओं की कमी, और उत्पादन के साधनों का अभाव जैसी समस्याएं भी विद्यमान हैं।

ग्रामीणों का विश्वास है कि यदि जनप्रतिनिधि और शासकीय विभाग मिलकर गंभीरता से प्रयास करें तो इन समस्याओं का समाधान संभव है। यह मामला अब सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्राम स्वराज की अवधारणा और प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा भी है।

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