बहती नदियों से जान जोखिम मे डाल कर निकला जा रहा रेत, माफियाओं का राज, कटघोरा में खनिज विभाग की चुप्पी से चरम पर पहुंचा अवैध रेत कारोबार!*

कोरबा छत्तीसगढ़

*कटघोरा/कोरबा*: जिले में रेत माफिया इतने बेखौफ हो गए हैं कि अब वे ट्रैक्टर और डंपर लेकर सीधा नदी के पेट में घुस गए हैं! ताजा तस्वीरें इस बात का सबूत हैं कि कटघोरा थाना क्षेत्र के कई रेत घाटों से अवैध रेत निकासी का खेल पूरे जोर-शोर से जारी है। और हैरत की बात — खनिज विभाग या तो अंधा है या पूरी तरह से ‘खामोश साझेदार’!

*जमीन पर हकीकत* — नदी में उतरे ट्रैक्टर, ट्रॉली में भरती रेत, और कहीं कोई रोक नहीं!
फोटो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे भारी संख्या में ट्रैक्टर नदी के भीतर जाकर रेत भर रहे हैं, मानो खुद की बपौती हो! न कोई माप, न कोई रॉयल्टी, न कोई अनुमति — लेकिन कारोबार बेरोकटोक चल रहा है।और इधर खनिज विभाग और प्रशासन की आँखें बंद हैं, जैसे देखा ही नहीं सुना ही नहीं!

*किसकी शह पर चल रहा है यह खेल?*
सूत्र बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर रसूखदार लोग और कुछ बिचौलिए मिलकर यह पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। खनिज विभाग की चुप्पी और पुलिस की निष्क्रियता ने माफियाओं के हौसले सातवें आसमान पर पहुंचा दिए हैं।

*बारिश में भी नहीं रुका उत्खनन* — क्या नियमों की बाढ़ आ चुकी है?
बरसात के दौरान नदी और नालों से रेत निकालने पर स्पष्ट रोक है, लेकिन यहाँ तो लगता है जैसे नियमों की खुद ‘धुलाई’ कर दी गई है।

*कई सवाल – कोई जवाब नहीं-*

क्या खनिज विभाग को इन गतिविधियों की खबर नहीं?
किस आधार पर इन ट्रैक्टरों को घाटों तक पहुंचने दिया जा रहा है?
क्या ये सब मिलीभगत से हो रहा है?

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