. राखड़ डैम से प्रभावित गांवों का आक्रोश: ‘धरना राजनीति नहीं, न्याय चाहिए

कोरबा छत्तीसगढ़

कोरबा। एनटीपीसी के राखड़ डैम मुआवजा विवाद ने अब गंभीर राजनीतिक रंग अख्तियार कर लिया है। बुधवार को ग्राम धनरास के ग्रामीणों ने जनपद सदस्य झूल बाई गोविंद सिंह और पूर्व सरपंच छत्रपाल सिंह के का पुतला दहन कर कड़ा विरोध दर्ज किया। आरोप है कि उन्होंने एनटीपीसी से असंबद्ध ग्राम लोतलोता के लोगों को आगे कर ऐसा धरना प्रदर्शन किया जिसका वास्तविक प्रभावित गांवों से कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीणों ने इसे “प्रदर्शन की राजनीति” करार दिया और इसे सीधे-सीधे राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताया।

मूल विवाद: असल प्रभावितों को दरकिनार कर “बाहरी” गांव को मंच बनाना

धनरास गांव वास्तव में एनटीपीसी के राखड़ डैम से प्रभावित हैं। यहां की खेती राख मिश्रित पानी से बर्बाद हो रही, भूजल प्रदूषित हो रहा, और हवा में राख उड़ने से जनजीवन संकट में है। पूर्व में तेज आंधी में उड़ती राख और रोजगार की मांग को लेकर इन्हीं गांवों में सरपंच नेतृत्व में धरना भी दिया गया था, जिस पर एनटीपीसी ने कुछ मांगें मानी थीं। वर्तमान सरपंच लक्ष्मी कंवर की ग्राम के प्रति निस्वार्थ सेवा और बढ़ती लोकप्रियता को देख कर अब जनपद सदस्य झूल बाई द्वारा ग्राम लोतलोता (जो सीएसईबी के राखड़ डैम से प्रभावित है) के ग्रामीणों को लेकर एनटीपीसी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इससे वास्तविक प्रभावित गांवों में गहरा असंतोष फैला है।

धनरास का तर्क: “जब राख उड़ रही थी, तब जनपद सदस्य कहां थीं?”

धनरास के ग्रामीणों ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा:

“जब तेज गर्मी में राख उड़ रही थी और हम तपती धूप में धरने पर बैठे थे, तब जनपद सदस्य हमारे साथ क्यों नहीं थीं? अब जब बरसात में राख दब गई है और कोई आपात स्थिति नहीं, तो अचानक प्रदर्शन क्यों? क्या यह किसी राजनीतिक मंच निर्माण की कवायद है?”

ग्रामीणों ने कहा कि यदि लोतलोता गांव प्रभावित है तो उन्हें सीएसईबी प्लांट या पाइपलाइन के पास धरना देना चाहिए, न कि एनटीपीसी के खिलाफ

राजनीतिक मंशा और “मंच साधना” का आरोप

 

ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा प्रदर्शन राजनीतिक प्रशिक्षण और प्रचार का हिस्सा है। जनपद सदस्य द्वारा जनता के मुद्दों को उपयोग में लाकर छवि निर्माण का प्रयास किया जा रहा है। बिना स्थानीय सहमति और संवाद के धरना करना जनहित नहीं, जनता को दरकिनार कर अपनी सियासत चमकाना है।

प्रशासन और एनटीपीसी की चुप्पी, सवालों के घेरे में कार्यशैली

इस विवाद के बावजूद प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन पूरी तरह मौन है। इससे ग्रामीणों की नाराजगी और गहरी हो गई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि मुआवजा राशि और रोजगार राजनीतिक प्रभाव में दूसरी दिशा में मोड़ी जा सकती हैं, जिससे वास्तविक पीड़ितों के साथ अन्याय होगा।

एनटीपीसी राखड़ डैम से विशेषकर धनरास गांव सीधे प्रभावित हैं।

जनपद सदस्य ने लोतलोता (जो CSEB से प्रभावित है) को लेकर एनटीपीसी के खिलाफ धरना शुरू किया।

धनरास के ग्रामीणों ने पुतला दहन कर जताया विरोध, इसे “राजनीतिक प्रदर्शन” कहा।

पूर्व में जब राख की समस्या चरम पर थी, तब जनपद सदस्य ने सहयोग क्यों नहीं दिया, अब बरसात में क्यों प्रदर्शन कर रही हैं।

ग्रामीणों ने पूछा — “सीएसईबी प्रभावित गांव क्यों एनटीपीसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं?” एनटीपीसी और प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में।

मुद्दों की लड़ाई नहीं, अब धरने की राजनीति

एनटीपीसी मुआवजे का मुद्दा अब सड़कों से सियासी मंचों तक पहुंच गया है। वास्तविक प्रभावितों को दरकिनार कर प्रदर्शन की राजनीति करने के प्रयासों ने ग्रामीणों को भड़का दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद मुआवजे से ज्यादा प्रतिनिधित्व और विश्वास के संकट में बदल सकता है।

ग्रामीणों का साफ संदेश है — “हम अपनी लड़ाई खुद लड़ सकते हैं, किसी को हमारे नाम पर मंच सजाने की जरूरत नहीं।”

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