कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा। 24 वर्षीय युवक तौफिक रजा उर्फ सोनू की रहस्यमयी मौत और उसके बाद ठेकेदार द्वारा शव को चुपचाप उड़ीसा से कोरबा लाकर बिना पोस्टमार्टम दफनाए जाने का मामला अब बड़ा रूप ले चुका है। परिजनों की मांग पर एसडीएम कोरबा सरोज कुमार महिलांगे ने शव उत्खनन कर पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है। साथ ही थाना बालको को समूचे प्रकरण की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
ठेकेदार की संदिग्ध भूमिका, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
रूमगरा निवासी नजरे इमाम ने बताया कि उनका बेटा तौफिक ठेकेदार भरत पाल और अरुण पाल के साथ उड़ीसा के रायगढ़ा जिले में निर्माण कार्य के लिए गया था। लेकिन 20 अप्रैल को शव घर लौटा, जिसके साथ कोई मेडिकल रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र या अस्पताल की जानकारी नहीं दी गई। परिजनों का आरोप है कि ठेकेदार ने तौफिक को बीमार हालत में दिखाया, फिर अचानक उसकी मृत्यु की सूचना दी और शव लाकर यह कहते हुए जल्दबाजी में दफन करवा दिया कि “बदबू आएगी, जल्दी करो”। मृतक का मोबाइल भी खाली कर दिया गया।
परिजनों ने उठाए कई सवाल: क्या साजिशन हुई मौत?
मृतक की मां से अंतिम बार 19 अप्रैल को वीडियो कॉल में तौफिक को अचेत अवस्था में दिखाया गया। इसके तुरंत बाद उसकी मौत की सूचना आई, जो संदेहास्पद है। ठेकेदार ने इलाज कराने के बजाय उसे घर लाने को प्राथमिकता दी, और मौत के असल कारणों को छिपाया। इससे परिजनों को हत्या की आशंका है। उन्हें शक है कि तौफिक के पिछले वेतन विवाद और ठेकेदारों से अनबन के चलते उसकी जान ली गई हो।
प्रशासन ने लिया संज्ञान, एसडीएम ने दिखाई संवेदनशीलता
लगातार प्रयासों के बाद जब पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब मृतक के पिता ने एसडीएम कोरबा को आवेदन दिया। एसडीएम सरोज कुमार महिलांगे ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। शव उत्खनन कर मेडिकल टीम से पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
न्याय की आस में माता-पिता
नजरे इमाम और उनका परिवार ठेकेदार भरत पाल व अरुण पाल पर आपराधिक षड्यंत्र, लापरवाही और साक्ष्य मिटाने के आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बेटे की मौत अगर स्वाभाविक थी, तो उसे छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी? आखिर इलाज के कोई दस्तावेज क्यों नहीं हैं? उनका मोबाइल क्यों साफ कर दिया गया?
पुलिस पर भी उठे सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने अब तक कोई प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज नहीं की है और ठेकेदारों से कोई सख्त पूछताछ नहीं की गई है। जबकि अब पोस्टमार्टम के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा और फिर कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
निष्कर्ष: यह मामला केवल एक युवक की संदिग्ध मौत का नहीं, बल्कि श्रमिकों के साथ होने वाली शोषण की घटनाओं और न्याय प्रक्रिया की गंभीर परीक्षा का विषय बन चुका है। अब प्रशासन की संवेदनशीलता और एसडीएम की तत्परता से परिजनों को न्याय की एक नई आशा दिख रही












