मध्यान्ह भोजन रसोइयों का गुस्सा फूटा: पैदल मार्च कर कलेक्टर कार्यालय का किया घेराव, वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़क पर बैठीं महिलाएं

कोरबा छत्तीसगढ़

कोरबा। शिक्षा विभाग में कार्यरत मध्यान्ह भोजन रसोइयों ने अपने वेतन में 50 प्रतिशत वृद्धि की मांग को लेकर आज कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पैदल मार्च करते हुए कार्यालय तक पहुंचकर जमकर नारेबाजी की। पिछले तीन दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहीं इन महिलाओं ने आज कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना देकर सड़क जाम कर दिया। उनकी मांग थी कि “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादे के अनुसार उनका वेतन बढ़ाया जाए।

₹2000 वेतन में कैसे गुजारा करें? महीनों तक वेतन का इंतजार!

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपनी बदहाल स्थिति को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि उन्हें मात्र ₹2000 वेतन मिलता है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, वेतन समय पर नहीं मिलता, और महीनों तक इंतजार करना पड़ता है।

जिलाध्यक्ष सुनीता मिरी ने कहा, “हम रसोइया दिनभर स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाते हैं, लेकिन हमारा अपना घर चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार ने वादा किया था कि सत्ता में आते ही वेतन बढ़ाएगी, पर अब कोई सुनवाई नहीं हो रही।”

उपाध्यक्ष ओमलला साहू ने कहा, “महंगाई आसमान छू रही है। ₹2000 में घर कैसे चलाएं? ऊपर से वेतन भी समय पर नहीं मिलता। हमें सरकार से जवाब चाहिए।”

तीन दिन से प्रदर्शन, आज पैदल मार्च कर पहुंचे कलेक्टर कार्यालय

रसोइया संघ की महिलाएं 17, 18 और 19 मार्च को लगातार तीन दिनों तक प्रदर्शन कर रही थीं, लेकिन कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण आज उन्होंने पैदल मार्च करते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान मिडिया प्रभारी मनीषा बंजरे, जिला सचिव रजबी बेगम, ब्लॉक अध्यक्ष तुलेश्वरी पटेल (कोरबा), अंजना महंत (कट्योरा), उषा राठौर (करतता), संतोषी कैवर्त (पाती), शशि परपंची (पोड़ीउपरोड़ा) सहित सैकड़ों महिलाएं मौजूद थीं।

प्रशासन हरकत में आया, ज्ञापन लिया – लेकिन समाधान कब?

रसोइयों का प्रदर्शन उग्र होता देख पुलिस और प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर महिलाओं से चर्चा की और उनका ज्ञापन लिया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा और जल्द निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि, रसोइया महासंघ की महिलाओं ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द उनकी मांगों पर अमल नहीं हुआ, तो वे और बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगी।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार मध्यान्ह भोजन रसोइयों की आवाज सुनेगी या वेतन वृद्धि के लिए उन्हें और संघर्ष करना पड़ेगा?

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