छत्तीसगढ़ जनवार्ता
कोरबा। कोरबा जिले के वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो रही है।
*वन विभाग की संदिग्ध भूमिका*

बालको वन क्षेत्र के जामबहार अजगर बहार मार्ग के समीप स्थित सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने की शिकायत वन विभाग को मिली। शिकायत के अनुसार, रात के अंधेरे में खुदाई मशीन चलाकर भूमि को समतल किया जा रहा था। अगली सुबह, वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और पाया कि एक कंक्रीट निर्माण कंपनी द्वारा उस सरकारी भूमि की कटिंग कर उसे समतल किया जा रहा है।
वन विभाग के उप-वन परिक्षेत्र अधिकारी और वनरक्षक ने मौके पर उक्त खुदाई मशीन के चालक को बुलाकर पूछताछ की। मशीन चालक ने बताया कि वह अपने मालिक के कहने पर यह काम कर रहा है। मालिक से पूछताछ करने पर उसने दावा किया कि वह भूमि उसकी निजी संपत्ति है और वह वहां पर बाउंड्री वॉल का निर्माण करवा रहा है।
जब वन विभाग ने ऑनलाइन जमीन के नक्शे की जांच की, तो पाया कि उस भूमि का एक हिस्सा वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसके बाद वन विभाग ने पटवारी को बुलाया और पता चला कि वह जमीन पहले आनंद सिंह के नाम पर थी, जिसे उन्होंने कुमार सिंह को बेच दिया। कंपनी ने वहां कंक्रीट के डिवाइडर बनाने का काम शुरू कर दिया था।
*वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल*

हालांकि वन विभाग ने मशीन को जब्त कर लिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कुछ हिस्से सरकारी भूमि के भी हैं, जिन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा जब्त की गई एक खुदाई मशीन को वन परिक्षेत्र कार्यालय में खड़ा किया गया है, लेकिन मौके पर काम कर रही बड़ी मशीन की तस्वीरें भी सामने आई हैं जो कि इस मशीन से अलग ही है। यानी कि जब्ती में किसी दूसरी मशीन को दिखाई जा रही है। इस बात ने विभाग की जांच कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मामला अधिकारियों की मिलीभगत का हो सकता है या फिर राजनीतिक दबाव के चलते वन विभाग मौन है।
*ग्रामीणों की चिंता*
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह जमीन निजी संपत्ति है, तो दिन के बजाय रातों-रात समतलीकरण का कार्य क्यों कराया जा रहा था? इसके अलावा, अन्य लोगों द्वारा शिकायत क्यों की गई और वन विभाग पर राजनीतिक दबाव क्यों बनाया जा रहा है?
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में भूमि का कुछ हिस्सा वन क्षेत्र में आता है, जबकि राजस्व नक्शे में वह निजी भूमि के रूप में दर्ज है। विभाग ने अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं की है और जांच जारी है।
*निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग*
कोरबा जिले के निवासियों ने वन विभाग से इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है, तो यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। अब देखने वाली बात होगी कि वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है? और क्या वह राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष जांच करेगा?










