गौरेला-पेंड्राछत्तीसगढ़
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मोदी सरकार की गारंटी पूरी न होने पर विरोध जताते हुए 11 सितंबर की शाम मशाल रैली का आयोजन किया। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में फेडरेशन के बैनर तले सैकड़ों अधिकारी और कर्मचारी सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय तक मशाल रैली निकाली। रैली के बाद मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया, जिसमें मांग की गई कि मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादे पूरे किए जाएं।
सरकार से नाराजगी और चेतावनी
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 27 सितंबर से प्रदेशभर के अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। फेडरेशन के संयोजक डॉक्टर संजय शर्मा और महासचिव विश्वास गोवर्धन ने कहा कि यह मशाल रैली सरकार को चेतावनी का आखिरी मौका है। उन्होंने कहा कि भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के तहत कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया है।
क्या हैं कर्मचारियों की मांगें?
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
कर्मचारियों को केंद्र के समान 1 जनवरी 2024 से महंगाई भत्ता में 4% वृद्धि के साथ 50% डीए स्वीकृत करना।
जुलाई 2019 से देय महंगाई भत्तों के एरियर्स राशि का जीपीएफ खाते में समायोजन।
प्रदेश के शासकीय सेवकों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान देना।
केंद्र के समान गृह भाड़ा भत्ता और अर्जित अवकाश नगदीकरण 240 दिन के स्थान पर 300 दिन देना।
फेडरेशन का बढ़ता आक्रोश
इससे पहले, 6 अगस्त को रायपुर में भी फेडरेशन ने मशाल रैली का आयोजन कर सरकार को चेताया था। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज फेडरेशन ने अब आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया है। 11 सितंबर की मशाल रैली में स्वास्थ्य, शिक्षा, और अन्य विभागों के कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मशाल रैली को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। प्रमुख मार्गों पर रैली निकालने से जाम की स्थिति भी बन गई, लेकिन पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती के कारण स्थिति नियंत्रण में रही।
विभिन्न संघों की भागीदारी
मशाल रैली में व्याख्याता संघ के जिला अध्यक्ष जनसभा सिंह पैकरा, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के एमपी रौतेला, डॉक्टर अभिमन्यु सिंह, अक्षय नामदेव, सुदर्शन भैना, संजीव मोहन पांडेय, शैलेंद्र नामदेव, सूरज चौहान, मोनिका जैन, और अन्य संघों के नेता उपस्थित रहे।
फेडरेशन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो हड़ताल के चलते छत्तीसगढ़ की आम जनता को होने वाली असुविधा के लिए सरकार जिम्मेदार होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया जाए और चुनावी वादों को पूरा किया जाए।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के इस विरोध प्रदर्शन से यह साफ है कि यदि सरकार जल्द ही मांगों को पूरा नहीं करती, तो आगामी दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।










